बारिश का इंतजार, किसान परेशान..
मानसून की बेरुखी किसानों पर भारी, आठ दिन में 40 प्रतिशत तक खरीफ फसलें झुलसीं
मुंगफली-बाजरे में सबसे अधिक नुकसान, अब तिलहन और दलहन की फसलें भी सूखने लगीं; समय पर बारिश नहीं हुई तो चारे का भी संकट
एंकर :- ( बी एल सरोज ) 19. जुलाई, 2026 :- सीकर जिले के रींगस उपखंड क्षेत्र में मानसून की लंबी बेरुखी अब किसानों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गई है। पिछले करीब आठ दिनों से बारिश नहीं होने के कारण खरीफ की फसलें खेतों में ही झुलसने लगी हैं। किसानों का कहना है कि अब तक लगभग 40 प्रतिशत से अधिक फसलें प्रभावित हो चुकी हैं। सबसे ज्यादा नुकसान मुंगफली और बाजरे की फसलों में देखने को मिल रहा है, जबकि अब तिलहन और दलहन की फसलें भी सूखने लगी हैं। किसानों के अनुसार शुरुआती बारिश के बाद अच्छी पैदावार की उम्मीद जगी थी और अधिकांश किसानों ने समय पर बुवाई भी कर दी थी। लेकिन इसके बाद बारिश का दौर पूरी तरह थम जाने से खेतों में नमी खत्म हो गई है। तेज धूप और उमस के कारण फसलों की बढ़वार रुक गई है तथा पौधे मुरझाने लगे हैं। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि यदि अगले एक-दो दिन में अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसलों को बचा पाना बेहद मुश्किल होगा। इससे उत्पादन में भारी गिरावट आने की आशंका है, जिसका सीधा असर किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। कृषि जानकारों का भी मानना है कि खरीफ की फसलों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण है। इस दौरान पर्याप्त वर्षा नहीं होने पर पौधों का विकास प्रभावित होता है और उपज में कमी आना तय माना जाता है। किसानों की चिंता केवल फसलों तक ही सीमित नहीं है। उनका कहना है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो खेतों में हरा चारा भी तैयार नहीं हो पाएगा, जिससे पशुपालकों के सामने पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा हो जाएगा। फिलहाल पूरे क्षेत्र के किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। किसान अच्छी बारिश की उम्मीद में ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं, ताकि खरीफ की फसलों के साथ-साथ पशुओं के चारे को भी बचाया जा सके।
एक टिप्पणी भेजें