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अनूठा एतिहासिक बावड़ी का बालाजी (हलधर) मंदिर!

अनूठा एतिहासिक बावड़ी का बालाजी (हलधर) मंदिर!

बावड़ी, रींगस, सीकर 
रिपोर्ट बी एल सरोज 
9413070728
बावड़ी बालाजी का इतिहास, काकड़ में नहीं गिरते हैं ओले
किसानों के हल के रूप में विराजमान हैं बालाजी 
लकड़ी के हल को आज़ तक नहीं लगी दीमक 

बावड़ी|  एनएच 52 स्थित बावड़ी का बालाजी मंदिर का निर्माण आज से करीब 50 से 65 वर्ष पहले हुआ था।इस मंदिर में  आस्था के साथ अचरज का बड़ा केंद्र है। करीब 60 से 65 साल पुराने के इस मंदिर के निर्माण में भामाशाहों के अलावा ईंट व पत्थर परिवहन करने वाले चालकों की भी अहम भूमिका रही है।जो भी वाहन चालक जैसे टैक्टर, ट्रक जो अपने वाहनों में ईंट,पत्थर,बजरी लेकर 
 मंदिर के सामने से गुजरने पर वाहन चालक अपने वाहन को सड़क के किनारे रोकर उसमें रखे ईंट व पत्थर बालाजी के नाम से चढ़ाता था।बावड़ी बालाजी के मंदिर के निर्माण के लिए ईंट व पत्थर
चढ़ाने की परंपरा आज भी वाहन चालक  लंबे समय से निभा रहे हैं। उन्हीं ईंटों से भव्य रूप ले चुके इस मंदिर में हनुमानजी के साथ योगी ओंकारनाथ महाराज की मूर्ति सहित एक हल भी जमीन में गड़ा है। इसका चमत्कार भी गांवों में चर्चा का बड़ा विषय है।
हल में नहीं लगी दीमक ......

ग्रामीणों के बताए अनुसार मंदिर निर्माण से पहले ठठेरा निवासी संत ओंकारनाथ ने गांव की रक्षा के लिए एक लकड़ी का उल्टा हल जमीन में गाड़ा था। इसके बाद कांकड़ के हनुमानजी प्रतिष्ठित किए थे। इतने साल बीतने पर भी हल में दीमक नहीं लगना अचरज का विषय है। ओंकारनाथ के प्रति आस्था को देखते हुए करीब दस साल पहले मंदिर में उनकी भी मूर्ति प्रतिष्ठित की गई।

मंदिर निर्माण के बाद से नहीं पड़े ओले........

ग्रामीणों ने बताया कि बावड़ी के बालाजी मंदिर के प्रताप ने गांव को प्राकृतिक प्रकोप से बचा रखा है। मंदिर निर्माण के बाद से अब तक क्षेत्र में ओलावृष्टि या अन्य प्राकृतिक आपदा नहीं आई है। मंदिर का धागा बांधने पर पशुओं तक के रोग भी ठीक हो जाते हैं।

गृहस्थ से सन्यासी बने ओंकारनाथ......

ठठेरा निवासी ओंकारनाथ का सौंथलिया गांव में ननिहाल था। उन्होंने संत इमरती नाथ से दीक्षा लेकर गृहस्थ धर्म त्याग वैराग्य अपनाते हुए तप किया था। ग्रामीणों के अनुसार आगजनी, ओलावृष्टी जैसी प्राकृतिक आपदाओं सहित ग्रामीणों व पशुओं को बीमारी व महामारी से भी बचाया। कहा जाता है कि वे गिरते ओलों को बीच में ही रोक देते थे। समाधि से पहले लोगों की प्रार्थना पर उन्होंने बावड़ी व सौंथलिया में कांकड़ के हनुमानजी के मंदिर की नींव रखी थी। जो भव्य रूप लेने के साथ आस्था का बड़ा केंद्र बन गया है। मंदिर में रामनवमी पर मेला लगता है। इसमें काफी लोग शामिल होते हैं।

सावन के महीने में मंदिर में लगते हैं विशाल भंडारे.... 

बावड़ी बालाजी धाम पर सावन के महीने में टैक्सी यूनियन एवं बावड़ी के ग्रामीणों के द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है इसके अलावा बावड़ी बालाजी धाम पर पूरे सावन महीने में भंडारे का आयोजन होता रहता हैं।


वर्तमान में मंदिर का काम है निर्माणाधीन...... 

बावड़ी बालाजी सेवा समिति अध्यक्ष गणपत सिंह बाजिया ने बताया कि बावड़ी बालाजी धाम पर मंदिर पर भामाशाहों के द्वारा तिबारे का निर्माण कार्य जारी है हाल ही में भामाशाहों द्वारा मंदिर परिसर में गेट्स हाउस बनवाया गया हैं इसके अलावा मंदिर के अंदर मार्बल का काम करवाया जा रहा हैं जल्द ही मंदिर का काम पूरा हो जायेगा।
वॉकथ्रू, ग्रामीणों से वन टू वन, विजवल

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