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गाड़िया लोहार परिवार के लाडले ने रचा इतिहास

गाड़िया लोहार परिवार के लाडले ने रचा इतिहास

रींगस के घुमंतू गाड़िया लोहार परिवार के बेटे ने रचा इतिहास, नीट में हासिल की सफलता

सीकर :- ( बी एल सरोज ) 17.7.2026.. जिले के रींगस में संघर्ष, मेहनत और दृढ़ संकल्प की मिसाल पेश करते हुए घुमंतू गाड़िया लोहार परिवार के होनहार छात्र सुनील पुत्र भगवान सहाय गाड़िया लोहार ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। देर रात घोषित हुए नीट परीक्षा परिणाम में सुनील की सफलता से पूरे शहर में खुशी की लहर दौड़ गई। विशेष बात यह है कि सुनील का परिवार आज भी पारंपरिक घुमंतू जीवन जी रहा है। सीमित संसाधनों और अनेक कठिन परिस्थितियों के बावजूद उसने अपनी मेहनत और लगन के दम पर यह मुकाम हासिल किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि संभवतः सुनील गाड़िया लोहार समाज से राजस्थान का पहला छात्र है जिसने नीट जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि होना अभी शेष है। गौरतलब है कि गाड़िया लोहार समाज स्वयं को वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के वंशजों में मानता है और वर्षों से अपनी पारंपरिक जीवनशैली को बनाए हुए है। ऐसे समाज से निकलकर सुनील का डॉक्टर बनने की दिशा में कदम बढ़ाना समाज के युवाओं के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि माना जा रहा है। सुनील की सफलता पर शहर में उत्साह का माहौल रहा। निवर्तमान नगर पालिका उपाध्यक्ष अमित शर्मा के नेतृत्व में शहरवासियों ने सुनील एवं उसके पिता भगवान सहाय गाड़िया लोहार का मुंह मीठा करवाकर सम्मान किया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उपस्थित लोगों ने कहा कि सुनील ने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
मां सीकरी देवी की आंखों में छलके आंसू...
सुनील की मां पढ़ी लिखी नही है उसे यह भी नहीं पता की नीट की परीक्षा क्या होती है पर बेटे के डाक्टर बनने की राह आसान होने पर खुशी से आंखें छलक पड़ी 
कम उम्र में शादी, बेटे को खोया पर दर्द भी नहीं डिगा पाया सुनील को 
गाड़िया लोहार जाति में कम उम्र में बच्चों की शादी की परंपरा चलती आ रही है और इसी परंपरा के चलते सुनील की भी शादी इंदिरा देवी से कर दी गई , इसी वर्ष सुनील के लड़का हुआ पर वह पांच माह की उम्र में ही चल बसा सुनील और परिवार पर यह घटना वज्र के प्रहार जैसी थी पर सुनील नहीं टूटा पिता भगवान सहाय और मां सीकरी देवी के साथ साथ पत्नी ने भी पूरा सहयोग किया और आज सुनील के डाक्टर बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया ।

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