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चित्तौड़गढ़ में नगर परिषद की फायर सेफ्टी को लेकर बड़ी कार्यवाही

चित्तौड़गढ़ में नगर परिषद की फायर सेफ्टी को लेकर बड़ी कार्यवाही

चित्तौड़गढ़ से गोपाल चतुर्वेदी की रिपोर्ट 

लखनऊ हादसे के बाद जागा प्रशासन, चित्तौड़गढ़ में दो लाइब्रेरी-कोचिंग सेंटर सीज, फायर सेफ्टी पर बड़ी कार्रवाई

चित्तौड़गढ़। लखनऊ की एक लाइब्रेरी में आग लगने से 15 छात्रों की दर्दनाक मौत के बाद आखिरकार चित्तौड़गढ़ प्रशासन की नींद टूटी है। जिले में संचालित कोचिंग सेंटरों और ई-लाइब्रेरी की फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं की जांच शुरू कर दी गई है। नियमों की अनदेखी करने वालों पर अब कार्रवाई का डंडा चलना शुरू हो गया है।

इसी क्रम में बुधवार को नगर परिषद की टीम ने कुंभानगर स्थित बेसमेंट में संचालित एस क्यूब लाइब्रेरी तथा नगर पालिका कॉलोनी में प्रथम तल पर संचालित द्रोणाचार्य कोचिंग सेंटर को सीज कर दिया। जांच में सामने आया कि दोनों संस्थानों में अग्निशमन मानकों की गंभीर अनदेखी की गई थी। न तो फायर एनओसी ली गई थी और न ही आवश्यक अग्निशमन उपकरण स्थापित किए गए थे।

नगर परिषद द्वारा 11 जून को दोनों संस्थानों को नोटिस जारी कर आवश्यक सुरक्षा इंतजाम करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन निर्धारित समयावधि में कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 194 के तहत कार्रवाई करते हुए दोनों संस्थानों को तत्काल प्रभाव से सीज कर दिया गया।

सीजिंग आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि फायर सेफ्टी व्यवस्था के बिना विद्यार्थियों और आमजन के जीवन को खतरे में डालना मानव जीवन के साथ गंभीर खिलवाड़ है। परिषद ने भवनों पर ताले लगाकर संचालन बंद करा दिया है। अग्नि सुरक्षा संबंधी सभी मानकों की पालना और आवश्यक एनओसी प्राप्त करने के बाद ही सीजिंग हटाई जाएगी।

कार्रवाई के दौरान फायर अधिकारी महेंद्र सिंह, कमलेन्द्र सिंह, देवेंद्र मेनारिया सहित नगर परिषद की टीम मौजूद रही।


जानकारी के अनुसार चित्तौड़गढ़ शहर में 50 से अधिक ई-लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं, जिन्हें नोटिस जारी किए जा चुके हैं। वहीं शहर के कई होटल, रेस्टोरेंट और व्यावसायिक कॉम्पलेक्स भी फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। कई जगहों पर फायर एनओसी तक नहीं है, जबकि कहीं एनओसी होने के बावजूद अग्निशमन उपकरण कबाड़ बन चुके हैं।

हालांकि प्रशासन की यह कार्रवाई अब सवालों के घेरे में भी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से बिना फायर सुरक्षा के संस्थान संचालित होते रहे, लेकिन कभी नियमित निरीक्षण या सख्त कार्रवाई नहीं की गई। लखनऊ की दर्दनाक घटना के बाद शुरू हुई यह मुहिम कहीं सिर्फ हादसे के बाद की औपचारिकता बनकर न रह जाए, यह बड़ा सवाल है।

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